जन्म कुंडली में सभी ग्रहों के राहु-केतु की धुरी में आ जाने से काल सर्प दोष बनता है, जिसके कारण जीवन में बार-बार बाधाएं, विलंब एवं मानसिक तनाव अनुभव होता है। पं. योगेश व्यास द्वारा उज्जैन में शास्त्रोक्त विधि से यह पूजा सम्पन्न कराई जाती है।
जब जन्म कुंडली के सभी सात ग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र एवं शनि — राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब काल सर्प दोष का निर्माण होता है। ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार यह स्थिति कार्यों में बार-बार बाधा, निर्णयों में विलंब, संबंधों में तनाव एवं मानसिक अशांति का कारण बन सकती है।
पं. योगेश व्यास द्वारा उज्जैन में इस दोष के शमन हेतु शास्त्रोक्त विधि-विधान से पूजन एवं अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है, जिसका उद्देश्य जीवन में संतुलन एवं शांति पुनः स्थापित करना है।
"पूजा से पहले दोष का प्रकार, प्रक्रिया एवं आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से साझा की जाती है।"
काल सर्प दोष के प्रभाव से जुड़ी सामान्य रूप से बताई जाने वाली कठिनाइयां।
कार्यों में बार-बार असफलता एवं विलंब
विवाह अथवा रिश्तों में विलंब
आर्थिक तंगी एवं धन हानि
स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां
मानसिक तनाव एवं अशांति
संतान संबंधी बाधाएं
राहु-केतु की स्थिति के अनुसार काल सर्प दोष 12 प्रकार का माना जाता है।
आत्मविश्वास की कमी एवं मन में अकारण भय की अनुभूति।
संतान एवं पारिवारिक सुख से जुड़ी बाधाएं।
मित्रों एवं संबंधियों से धोखे की आशंका।
पारिवारिक जीवन में अस्थिरता एवं मतभेद।
यश एवं सम्मान प्राप्ति में विलंब।
आर्थिक उन्नति में रुकावटें।
अकारण चिंता एवं निर्णय क्षमता में कमी।
स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति से जुड़ी बाधाएं।
करियर एवं व्यवसाय में बार-बार बदलाव।
शत्रुओं से हानि की आशंका।
वैवाहिक जीवन में तनाव।
दीर्घकालिक प्रयासों के बाद ही सफलता।
शास्त्रोक्त विधि से पूजा सम्पन्न होने के पश्चात अनुभव की जाने वाली मान्यताएं।
धन संबंधी बाधाओं में कमी
संबंधों में सामंजस्य
मानसिक एवं शारीरिक शांति
भय एवं चिंता में कमी
शास्त्रोक्त विधि-विधान के सात प्रमुख चरण।
पूजा का शुभारंभ संकल्प एवं विघ्नहर्ता पूजन से।
पवित्र कलश स्थापित कर देवताओं का आवाहन।
नौ ग्रहों की शांति हेतु पूजन।
चांदी के सर्प यंत्र की स्थापना एवं पूजन।
भगवान शिव का अभिषेक एवं आराधना।
दीर्घायु एवं स्वास्थ्य हेतु जाप अनुष्ठान।
पूर्ण विधि की आरती एवं शुभ विसर्जन।
पूजा प्रसाद एवं आशीर्वाद के साथ समापन।
उज्जैन में पं. योगेश व्यास द्वारा सम्पन्न पूजा से जुड़ी मान्यताएं।
पूर्ण विधि-विधान एवं शास्त्र सम्मत प्रक्रिया
शीघ्र दोष निवारण हेतु समर्पित अनुष्ठान
पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति

आर्थिक उन्नति एवं स्थिरता
वैवाहिक जीवन में सामंजस्य
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
ये तिथियां पूजा हेतु विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं।
पूजा के प्रकार एवं विधि के अनुसार दक्षिणा में परिवर्तन हो सकता है।

अपनी जन्म कुंडली की जांच पं. योगेश व्यास से सीधे परामर्श कर करवाएं और सही पूजा विधि जानें।
आपकी जानकारी का उपयोग केवल पूजा संबंधी संपर्क और booking सहायता के लिए किया जाएगा।
तारीख, प्रक्रिया, शुल्क एवं उपलब्धता के लिए सीधे पंडित जी से बात करें।